चौथी दुनिया | Fourth World

By and | 1 October 2016

Translated from the English to the Hindi by Rekha Rajvanshi

गूरी लड़की, क्यों बैठी हो होठों पर चुप लगाए
अपनी आँखों में जाने क्या रहस्य छिपाए?
पूरी दुनिया के लोग मारपीट में लगे हैं
एक दूसरे को ठगे हैं
तुम कुछ नहीं कहतीं पर कुछ तो घटा है,
तुम्हारे लिए आत्मसम्मान बहुत बड़ा है 


माहौल है ख़ामोशी से भरा,
तुम चुपचाप सुन रही हो कि लड़का कैसे मरा?
क्या सोच रही हो? कुछ नहीं?
पर शब्द शनैः-शनैः लौटने लगते हैं कहीं

कि उसने कैसे तुम्हें निर्वस्त्र किया,
कैसे तुम्हारे पेट में लात मारी
पर शुक्र है उसके पास बन्दूक नहीं थी दुनाली
कि कैसे उसके परिवार ने मार डालने की धमकी दी
और तुम भागी के खुद को बचाना
किसी फ्लैट में कहीं
पर – प्लीज़ – किसी को न बताना

वह सोचता है, सुधर जाएगा
और तुम्हारा मुरी मैन बन जाएगा
जब कि तुम्हें पता है वो दुष्चक्र चलाएगा
आएगा तो फिर मारपीट कर जाएगा
तुम प्रेम करती रहोगी
पर उसे बदल न सकोगी, तुम भी तो हो जानती
तुम सिर्फ चाहती हो – अच्छा घर और शांति

उसने तुम्हें जिस पार्क में छोड़ा
उसका नाम तुम नहीं जानतीं
तुमने नार्थ में कलेक्ट कॉल लगाया,
कहा – ‘आओ
मेरी मदद करो, मुझे दोषी मत ठहराओ’
पुलिस ने तुम्हें शैल गैस स्टेशन पहुँचाया
‘काली कुतिया, सब एक सी हैं’ मन में बुदबुदाया


न टैक्सी का भाड़ा न परिवार,
और तुम बेबस शर्मसार
कुछ हफ्ते पहले ज़ख्म भरे,
पर मुसीबत के पहाड़ टूट पड़े
दो सौ पचपन डॉलर हफ्ते की पगार
दो सौ अड़तालीस का किराया
तीनों बच्चों को यूनिफार्म चाहिए
आज दादी ने बताया


तुम शुक्रवार की रात काम पकड़ लेती हो
और उन्हें पढ़ने का अवसर देती हो
जी जान लगाती हो ज़िन्दगी का भार ढोती हो
पर जब तुम ग़मग़ीन होकर रम पीती हो,
मैं चाहती हूँ रोना
क्या कहूँ बस इतना
कि मौत के हाथों
नहीं चाहती तुम्हें खोना

तुम्हारी नज़र सीधी है, दिल मज़बूत है
और आँखों में साहस है
पर बहन
कभी तो खुद को 
उन्मुक्त करो
और खुले आकाश में ऊँची उड़ान भरो

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